online marketingकुछ बातें मेरे दिल की..

Monday, July 04, 2011


||अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं Achyutam keshavam krishna damodaram
रामा नारायणं जानकी वल्लभं Raama narayanam jaanaki vallabham ||

कौन कहेते है भगवान आते नहीं Kaun kehete hai bhagwan aatey nahin – 2
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं Tum meera ke jaise bulaate nahin – 2

||अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं Achyutam keshavam krishna damodaram
रामा नारायणं जानकी वल्लभं Raama narayanam jaanaki vallabham ||


||अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं Achyutam keshavam krishna damodaram
कौन कहेते है भगवान खाते नहीं Kaun kehete hai bhagwan khatey nahin – 2
बेर शबरी के जैसे खिलते नहीं Ber Shabri ke jaise khilate nahin -2रामा नारायणं जानकी वल्लभं Raama narayanam jaanaki vallabham ||

कौन कहेते है भगवान सोते नहीं Kaun kehete hai bhagwan sotey nahin – 2
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं Maa yashoda ke jaise sulaate nahin – 2

||अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं Achyutam keshavam krishna damodaram
रामा नारायणं जानकी वल्लभं Raama narayanam jaanaki vallabham ||

कौन कहेते है भगवान नाचते नहीं Kaun kehete hai bhagwan naachte nahin – 2
गोपियों के तरह तुम नचाते नहीं Gopiyon ke tarah tum nachate nahin – 2

||अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं Achyutam keshavam krishna damodaram
रामा नारायणं जानकी वल्लभं Raama narayanam jaanaki vallabham ||

Thursday, February 03, 2011

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
के ज़िन्दगी तेरी जुल्फों
की
 नरम छांव में गुजर न पाती
तो शादाब हो भी सकती थी


ये तीरगी जो मेरे जीस्त का मुकद्दर है

तेरी नजर की शुआओं में खो भी सकती थी
अजब न था के मैं बेगान-इ-आलम हो कर

तेरे ज़माल की रानाइओ मे खो रहा था 
तेरा गुदाज़ बदन तेरे नीम बार आँखे

इन्ही फसानो में मैं खो रहा था


पुकारती मुझे जब तल्खायीं ज़माने की 
तेरे लबो से हालावत के घूंट पी लेता

हयात चीखती फिरती बारहना सर, 
और मैंघनेरी जुल्फों के साए मे जी लेता
मगर ये हो न सका और अब ये आलम है 

के तू नहीं, तेरा गम ,तेरी जुस्तुजू भी नहीं
गुजर रही है कुछ इस तरह ज़िन्दगी जैसे
इसे किसी के सहारे की आरजू भी नहीं

न कोई
 राह, न मंजिल ,न रौशनी का सुराग

भटक रही है अंधेरो में ज़िन्दगी मेरी
इन्ही 
अंधेरो में रह जाऊंगा कभी खोकर

मै जानता हूँ मेरी हम नफस, मगर युहीं
कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है,,,,,,, 

सब भर तेरे इंतजार करने की आदत सी हो गई है.

तुम लोट के आवोगे हमशे मिलने,
रोज दिल को बहलाने की आदत सी हो गई है,
तेरे वादे पे किया भरोसा हमने,
सब भर तेरे इंतजार करने की आदत सी हो गई है..

गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय ॥

यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान |
शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान ||

सब धरती काजग करू, लेखनी सब वनराज |
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाए ||

ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये |
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ||

बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर |
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ||

निंदक नियेरे राखिये, आँगन कुटी छावायें |
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुहाए ||

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय |
जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय ||

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय |
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय ||

माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे |
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदुंगी तोहे ||

पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात |
देखत ही छुप जाएगा है, ज्यों सारा परभात ||

चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये |
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए ||

मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार |
फूले फूले चुन लिए, कलि हमारी बार ||

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब |
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब ||

ज्यों तिल माहि तेल है, ज्यों चकमक में आग |
तेरा साईं तुझ ही में है, जाग सके तो जाग ||

जहाँ दया तहा धर्म है, जहाँ लोभ वहां पाप |
जहाँ क्रोध तहा काल है, जहाँ क्षमा वहां आप ||

जो घट प्रेम न संचारे, जो घट जान सामान |
जैसे खाल लुहार की, सांस लेत बिनु प्राण ||

जल में बसे कमोदनी, चंदा बसे आकाश |
जो है जा को भावना सो ताहि के पास ||

जाती न पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान |
मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान ||

जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए |
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए ||

ते दिन गए अकारथ ही, संगत भई न संग |
प्रेम बिना पशु जीवन, भक्ति बिना भगवंत ||

तीरथ गए से एक फल, संत मिले फल चार |
सतगुरु मिले अनेक फल, कहे कबीर विचार ||

तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय |
सहजे सब विधि पाइए, जो मन जोगी होए ||

प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाए |
राजा प्रजा जो ही रुचे, सिस दे ही ले जाए ||

जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही |
ते घर मरघट जानिए, भुत बसे तिन माही ||

साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै थोथा देई उडाय॥

पाछे दिन पाछे गए हरी से किया न हेत |
अब पछताए होत क्या, चिडिया चुग गई खेत ||

उजल कपडा पहन करी, पान सुपारी खाई |
ऐसे हरी का नाम बिन, बांधे जम कुटी नाही ||

जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही |
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही ||

नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए |
मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए ||

प्रेम पियाला जो पिए, सिस दक्षिणा देय |
लोभी शीश न दे सके, नाम प्रेम का लेय ||

प्रेम भावः एक चाहिए, भेष अनेक बनाये |
चाहे घर में बास कर, चाहे बन को जाए ||

फल कारण सेवा करे, करे न मन से काम |
कहे कबीर सेवक नहीं, चाहे चौगुना दाम ||

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर ॥

माया छाया एक सी, बिरला जाने कोय |
भागत के पीछे लगे, सन्मुख आगे सोय ||

मन दिना कछु और ही, तन साधून के संग |
कहे कबीर कारी दरी, कैसे लागे रंग ||

काया मंजन क्या करे, कपडे धोई न धोई |
उजल हुआ न छूटिये, सुख नी सोई न सोई ||

कागद केरो नाव दी, पानी केरो रंग |
कहे कबीर कैसे फिरू, पञ्च कुसंगी संग ||

कबीरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर |
जो पर पीर न जानही, सो का पीर में पीर ||

जाता है तो जाण दे, तेरी दशा न जाई |
केवटिया की नाव ज्यूँ, चडे मिलेंगे आई ||

कुल केरा कुल कूबरे, कुल राख्या कुल जाए |
राम नी कुल, कुल भेंट ले, सब कुल रहा समाई ||

कबीरा हरी के रूठ ते, गुरु के शरणे जाए |
कहत कबीर गुरु के रूठ ते, हरी न होत सहाय ||

कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और ।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर ॥

कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी |
एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पाँव पसारी ||

कबीर खडा बाजार में, सबकी मांगे खैर |
ना काहूँ से दोस्ती, ना काहूँ से बैर ||

नहीं शीतल है चंद्रमा, हिम नहीं शीतल होय |
कबीर शीतल संत जन, नाम सनेही होय ||

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय |
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ||

राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय |
जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय ||

शीलवंत सबसे बड़ा सब रतनन की खान |
तीन लोक की सम्पदा, रही शील में आन ||

साईं इतना दीजिये, जामे कुटुंब समाये |
मैं भी भूखा न रहूँ, साधू न भूखा जाए ||

माखी गुड में गडी रहे, पंख रहे लिपटाए |
हाथ मेल और सर धुनें, लालच बुरी बलाय ||

सुमिरन मन में लाइए, जैसे नाद कुरंग |
कहे कबीरा बिसर नहीं, प्राण तजे ते ही संग ||

सुमिरन सूरत लगाईं के, मुख से कछु न बोल |
बाहर का पट बंद कर, अन्दर का पट खोल ||

साहिब तेरी साहिबी, सब घट रही समाय |
ज्यों मेहंदी के पात में, लाली रखी न जाए ||

संत पुरुष की आरती, संतो की ही देय |
लखा जो चाहे अलख को, उन्ही में लाख ले देय ||

ज्ञान रतन का जतन कर, माटी का संसार |
हाय कबीरा फिर गया, फीका है संसार ||

हरी संगत शीतल भया, मिटी मोह की ताप |
निश्वास सुख निधि रहा, आन के प्रकटा आप ||

कबीर मन पंछी भय, वहे ते बाहर जाए |
जो जैसी संगत करे, सो तैसा फल पाए ||

कुटिल वचन सबसे बुरा, जा से होत न चार |
साधू वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार ||

आये है तो जायेंगे, राजा रंक फ़कीर |
इक सिंहासन चढी चले, इक बंधे जंजीर ||

ऊँचे कुल का जनमिया, करनी ऊँची न होय |
सुवर्ण कलश सुरा भरा, साधू निंदा होय ||

रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।
हीरा जन्म अमोल सा, कोड़ी बदले जाय ॥

कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय |
भक्ति करे कोई सुरमा, जाती बरन कुल खोए ||

कागा का को धन हरे, कोयल का को देय |
मीठे वचन सुना के, जग अपना कर लेय ||

लुट सके तो लुट ले, हरी नाम की लुट |
अंत समय पछतायेगा, जब प्राण जायेगे छुट ||

तिनका कबहुँ ना निंदये, जो पाँव तले होय ।
कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घानेरी होय ॥

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर ।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ॥

जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल।
तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल॥

उठा बगुला प्रेम का, तिनका चढ़ा अकास।
तिनका तिनके से मिला, तिन का तिन के पास॥

साधू गाँठ न बाँधई उदर समाता लेय।
आगे पाछे हरी खड़े जब माँगे तब देय॥

Saturday, January 29, 2011

कसमे वादे प्यार वफा सब बाते है..

आज ये गाना सुन रहा था क्या गाना है सब कुछ सच 100 प्रतिशत सत्य.
पुराने गानो का मतलब हुवा करता था. मैं ये नही कह रहा आज के गानो का मतलब नही होता.
होता है पर उन गानो की बात ही कुछ और थी आज भी लगता है जैसे जीती हो ये गाने..

Tuesday, November 09, 2010

मानवता

मनुष्य देवता न बने, कोई गम नही,
मनुष्य दानव न बने, यह भी कम नही।
              न जीए दुसरों के लिए, कोई गम नही,
              जीने दे दुसरों को, यह भी कम नही ।
न बने सहारा किसी का, कोई गम नही,
न तोड़े सहारा किसी का, यह भी कम नही।
             रोए न दुसरो के लिए, कोई गम नही,
             न रुलाए दुसरो को, यह भी कम नही।
न उठाए गिरे हुऔं को, कोई गम नही,
उठतों को न गिराए, यह भी कम नही।
             न जाने दुसरो को, कोई गम नही,
             अपने को जान पाए, यह भी कम नही।
मनुष्य देवता न बने, कोई गम नही,
मनुष्य मनुष्य ही रहे, यह भी कम नही।

Thursday, December 04, 2008

10/10/2008

माँ से बड़ा कलेजा किसी का नही हो सकता है, जो अपने बच्चे को पहले अपने गर्भ मे नौ माह अपने खुन से सिचती है फिर रात को रात नही दिन को दिन नही समझती है उसकी जिंगदी अपने बच्चे से शुरु होकर वही आसपास रह जाती है. एक बच्चा चाहे जितना बड़ा हो जाए पर माँ को नही समझाने लायक नही होता। क्योकि आप जिसे समझाना चाहते हैं आप वही से आये हैं आपने चलना वहीं से सीखा आपने बोलना वही से सीखा है, शायद ही कोइ हो जो अपने माँ को तकलीफ दे.

एक लड़की जो अपने उसी माँ को छोड़ के आपके साथ हो जाती है, जिसकी सुबह साम आप हैं जो आप से शुरु होती है आप मे रह जाती है. जिसकी आशा निराशा आप हैं. आप ही रोशनी हैं

जब इन दोनो के बिच में आप आ जायें तो क्या करना है क्या कोई बता सकता है क्या करना है क्या कोई बता सकता है शायद उपर वाले पे छोड़ देना ज्यादा सही कदम होगा पर नही हर समस्या का समाधान है तो इसका भी होगा सोचते है रास्ता मिल जायेगी फिर मंजील भी दिखेगी. कोशीश करना आपका काम है जो दिल से होना चाहिय जो करना है आपको .
09/10/2008
किसी ने ठीक ही कहा है. आप सिर्फ चल सकते हैं, बस आपने चलना है तय कोई और कर रहा होता है किस तरफ चलना है आपको, यह बात लड़कियो के मामले मे ज्यादा सटिक और कड़ी हो जाती है. तय करने वाले को लगता है मैं ये इसके अच्छे के लिए कर रहा हुं जो वो करता भी है, पर बिना जाने बिना सोचे चाहे वह मोबाइल मे बात नही करने देना हो या ठीक से चलो या ये मत पहनो . ठीक है मन मार के उन्हे करना भी परता है यह सब पर क्या हर जगह हर मोड़ पे इसी तरह चलना होगा. क्यों ? सिर्फ लड़की होने के कारण इतना कुछ, मैं नही जानता कल क्या होगा पर इतना पता है. जो होगा वह अच्छा ही होगा. हम हवा कि दिशा तो नही बदल सकते हैं पर नाव के पाल को सही कर सही दिशा मे चल सकते हैं, यह तो हमारे हाथ मे है.
कुछ बातें, बहुत लोगो को पसंद आती है पर जरुरी नही की सभी को पसंद आ जाए.
आप अगर सही हैं, तो बिलकुल बिना सोचे सच कहे, सामने वाले को हो सकता है बुरा लग जाये, पर याद रहे सच सही है, नही कहने से अच्छा है सच कहे. झुट बोलने से अच्छा है न बोले....

जीवन जीने का नाम है

जीवन जीने का नाम है सो इसे पुरा जीना चाहिये. खुशी या गम दोनो जरुरी है, तो दोनो के लिए तैयार रहिये.
कब क्या होगा या होना है यह आपके हाथ मे नही है, पर जो है उसे करने मे देरी नही करना कभी, क्या पता वो तुम्हारी जिन्दगी की मंजिल तय कर दे.
अगर सिर्फ चीनी का स्वाद मिलते रहे तो आप भुल जाते है कि चीनी कि मिठास क्या है, इक तिखी मिर्ची के बाद जरा सी चीनी से पता चलता है की मिठास किसे कहते हैं.
सो जब भी खुशी दिखे उस पल के कतरे कतरे को जिये, जब गम दिखे उसे आने दे क्योंकि वो आयगी फिर चली जायगी, तो यह गम के बाद खुशी और अच्छा लगने लगेगा उस खुशी की तैयारी करें, गम को जाने दें.
हर शाम की सुबह होती है, क्यों..... है न.........
.KR.

Sunday, September 28, 2008

प्यार है या सजा

प्यार है या सजा ऐ मेरे दिल बता टुटता क्यों नही दर्द का सिलसिला,
या रब्बा दे दे कोइ जान भी अगर, दिलबर पे हो न कोइ असर.

क्या गाना है साहब , दिल को छु गया जरुर सुनिये फुरसत में.

Thursday, February 02, 2006

Sinus ! एक बहुत बड़ी समस्या है समाधान है साइनस का

एक तो बहुत दिनों के बाद कुछ लिख रहा हूं और उसपे भी समस्या का जिक्र क्योंकि यही है वो प्रमुख समस्या जिसके कारन मैं इंटरनेट क्या लगभग हर एक चीज से ज़ुदा था। एक तो मेरी नाक के अंदर की मांस बढ़ी हुई है और धुल से एलर्जी है उसपे जबरदस्त ठंड थी तीनो ने मिलके लगभग मेरी सांस ही बंद कर दी थी।
बहुत सारे डाक्टरों को दिखाया गुलाबबाग, पूर्णियां, से शुरु करके गंगाराम दिल्ली, हो या एम्स दिल्ली, हो सब जगह दिखाया सभी ने या तो ऑपरेशन करने की सलाह दी पर कहा कि फिर हो सकता है अंत में हारकर घर वापस आ गया क्योंकि ऑपरेशन करवाने के पझ में मैं नही था गंगाराम में जो दवा दी गई उससे थोड़ी राहत तो हुइ पर फिर गुलाबबाग में वही स्थति थी।
फिर मेरी मुलाकात एक और साइनस के रोगी से गुलाबबाग में ही हो गइ उसने मुझे एक ड्रॉप का नाम दिया यह तो मेरे लिए राम वाण हो गया भैया क्या बताउं जहां भी दिक्कत आती है  तुरत डाल लेता हूं और तुरत आराम मिलता है। हां ड्रॉप डालने से पहले मैंने डाक्टर से सलाह जरुर ले लिया ताकी किसी प्रकार की और परेशानी में न आ जाउं । ड्राप का नाम है Otrivin ( Xylometazoline Hydrochloride Nasal Drops IP ) जब भी नाक बंद हो ले लेता हूं 5 - 10 मिनट में आराम मिल जाती है । कोई भी भाई लेने से पहले डाक्टर की सलाह जरुर ले।
वैसे अगर आपके पास किसी प्रकार की सलाह हो तो जरुर दे ताकी मांस जो बढ़ गई है कम हो जाए तो मैं एक आम जिन्दगी जी सकूं।